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Friday, 1 May 2020

लंबा इंतजार

कुछ लोग मौत से डरते है,
कुछ इसकी दुआ करते हैं।
कैसे कटेगी इतनी लंबी रात,
सूरज ढलने के बाद।
हर वक़्त तेरे इंतेज़ार में,
मैं चौकन्नी खड़ी हु।
जब आये तू दरवाजे पे,
मैं तैयार बैठी हु।
वक़्त की हरियाली में,
भूल गयी अपने बचपन के अंधेरे को।
भूल गयी थी मैं,
कि अंधेरे के साए में पली हु में।
बंद कमरे में क़ैद,
चीख़ने चिल्लाने से
अंधेरा दूर नही होता।
हमेशा अकेलेपन से दूर भागी हु मैं,
पर उसने मेरा साथ ना छोड़ा।
हर मोड़ पर, कब कहाँ दिख जाए
कब फिर से मेरा हाथ पकड़ले।
कभी कभी लगता है,
सदियां बीत गयी।
और कभी लगता है,
अभी तो ज़िन्दगी शुरू हुई थी।
ज्यादा हँसी से हमेशा से डरी हु,
कहीं छोड़ के ना चलि जाए।
खुली आँखों से सपने देखे
कि बंद आंखों से नमी ना निकल पाए।
अब तक जो तेरा साथ था,
बस उसका शुक्रिया।
दिन हो या रात,
बस आपका शुक्रिया।

Saturday, 8 June 2019

उड़ गयी चिड़िया


नन्ही सी गुड़िया थी वह
पर भी न आये थे उसके अभी।
मुस्कुराती, इठलाती चुलबुल चिड़िया थी वह
माँ बाप के आखों का तारा,
बुझ चुका है आज।
रूंध दिया एक नन्हे फुल को,
भेज दिया जल्लाद के हाथ।
उस नन्हें की कीमत
थी दस हज़ार से काम,
ट्विंकल की जान ने पूरी कर दी वह रकम।

इंसान को देख के,
शैतान भी है आज हैरान।
कहा से आयी यह हैवानियत,
कौन है इनका भगवान्?

माया के जाल में,
फस गया तू इंसान।
क्या रमज़ान और क्या दिवाली,
जब किसी के ख़ून से
बढे हमारी शान।

Twinkle Sharma murder

Sunday, 11 March 2018

महीने के वह दिन...



सैलाब एक उमड़ आता है दर्द का,

नैनों से मोती बरसते रहे

वह ना समझ पाए मेरी इस टिस को,

ना मैं उन्हें कुछ कह पाउ।

बस एक कोना देदो अपने दिल में,

सिमट  के  रहने  दो मुझे उधर।

बुलंद है आज भी यह आवाज़,

कुछ दिन चुप रहने दो मुझे। 

महीने के वह दिन,

आँसू बहने दो मेरे।

Monday, 1 January 2018

Evergreen Mother, Forever Alive


Right since I was born, 
I have been hearing stories about your gallantry. 
Right since my mother was a small child, 
Till my aunt got married
You were the tree whose roots were spread far and wide. 
You were the visionary 

पतझड़ में भी फुल उगाने वाली, 
जड़ों से बड़ी लटें उगाने वाली। 
'माँ' यह नाम रौशन किया तूने,
 अपनी ज़िन्दगी को निसार किया तूने।
 दुःख सुःख में अंतर भूल के,
 बस अपने पथ पर चलती चली।
तेरी लटें आज फैली है पूरी दुनिया में,
तूने सिखाई सीख सबको।
अपने कन्धों पर सबको बड़ा करके,
आज उन्हीं के चार कन्धों पर चली गई तु।
दुःखों का पहाड़ अगर यह परिभाषा सच में है,
तो माँ तूने हिमालय देखा इस जीवन में है।
घर बार ऎसे चलाती रही,
जैसे कहीं कोई कमी नहीं है। 

हे माँ, तुझे शत शत नमन। 
   


(In loving memory of my maternal grandmother)




Thursday, 14 September 2017

Bharat 'aage' badh raha hai


Dekh rahi hu maula,
duniya ke rang badalte.
Is chalchitra par kabhi aise toh kabhi waise,
duniya ghum rahi hai.

Bharat badh raha hai aage shayad,
ya fir yeh sab ek Media Circus hai,
samay sabkuch batla dega.

Kaha ja raha hai yeh desh apna,
Bullet train ki seeti jaisa bhaag raha hai
Bharat apna. 

Kahe kavitri sab jan ko, 
sambhal kar rehna, 
Circus ke is mayajaal se.
Ring master chabuk ghumaaye, 
Daudaaye humain ek kataar main. 

Note badalte der na lagti, 
desh badalne ka intezaar hai.
Ab hamari saari jaankari, 
is sarkar ke paas hai.

Daudta rahe insaan,
Bullet train ki speed se. 
Yaha jaaye ki waha jaaye, 
hain hum toh isi Circus ki rekh main. 

Friday, 1 September 2017

Dedicated to a little girl


Manzil badal gayi hai teri,
Raah main kuch kaante aagaye,
Zindagi jaisi sochi thi,
Ab use alag jeeyegi tu.

Zindagi ne jaldi zeher dikha diya,
Jaisa socha tha, use alag sheher dikha diya. 
College jaaungi main,
Doctor banungi main,
Ache ghar main shaadi karungi main.

Shayad ab alag hoga,
Shayad ab bhi doctor/engineer ban jaau,
Par logon ko alag nazariyen se dekhungi main,
Allah toh jaha tha wahi rahega, teri rehmat ko alag nazariyen se dekhungi main. 

(Dedicated to the little girl (Chashmawala family) who lost everything in Bhendi Bazaar crash on 31 August 2017)

Monday, 5 August 2013

इंतज़ार


कोई दोस्त बनता है तो कोई प्यार,
किसीने मेरी रूह को छुआ और किसीने मेरा दिल

एक के साथ मैंने कई सपने देखे 
और एक के साथ मैंने कुछ और सपने पूरे किये।

इन सब उलझनों मैं,
इन्ही करामातों मैं प्यार कही खो गया

बस रह गयी यादें, उम्मीदें और एक टीस
एक टीस जो चुबती है इस खालीपन मैं

मेरे कर्मों पर रेहम कर मेरे मौला,
मुझे इस खालीपन से बचाले मेरे मौला
दुनिया की जन्नत भी इसे भर नहीं सकती,
इसे प्यार से भर दे मेरे यार

ऐसे ही कब तक चलती रहूंगी मैं मंज़िल के इंतज़ार मैं,
राहों से भी तो दिल बहलाना है मुझे





Sunday, 7 July 2013

नूरला, लदाख


एक अलग ही दुनिया मैं आयी हु मैं।
'Indus' जिससे 'India' को अपनी पहचान मिली,
नाम मिला
उसे देख रही हु मैं।
उसकी शीतलता और उसका रौद्र रूप दिखा मुझे
पहाड़ों को काटता हुआ रास्ता दिखा मुझे।
यह नदी ही है जो देश की सीमाएं अनदेखा कर दे।
दो देशों मैं पानी बांटे।
एक अलग ही नज़ारा है यहाँ का।
इस देश की बेटी हु मैं
पर अलग सा लगता है मुझे यहाँ।
पत्थरों के कंक्रीट से पहाड़ों के बीच।

कितनी अलग पहचान है लदाख की,
कितनी दुर्लभ है यह जगह।
इनको समेटना चाहु मैं अपनी आँखों मैं,
पर नैनों की सीमाओं के परे है यह दुनिया।
फिर लगता है इसे यहाँ छोड़ दू और
अपने तरीके से जीने दू।
चलना होगा अब मुझे,
नए रास्ते की तलाश मैं।
चलते ही रहना है
नया सूरज खोजने,
एक अलग दुनिया की तलाश मैं।





Friday, 5 July 2013

शिवालय


जब देखती हु गोरैया को तो पाती हु तुझे।
 जब सुनती हु हर चिड़िया को,
जब रंग निहारती हु, तो लगता है
तू समाया है उसमें।
जब देखती हु उत्तराखंड को,
तो तेरा तांडव दिखता है।

जब देखती हु शीतल नदी को
तो तेरा प्रेम दिखता है।
जीने का मकसद भी देता है
और मरने का भी तू।

हिमाल बुलाये मुझे बार बार
कभी बर्फ के बीच
कभी बादलों की छाओ मैं
कभी अपनी खिसकती मिटटी मैं
कभी अपनी शान सी ऊंचाई मैं।
कभी दिखता है,
हिमाल हरियाली के बीच,
कभी सिर्फ पत्थरों मैं,
पर तू ही है जिसने
हिमाल है बनाया
और हम ही है जो बिगाड़ते है इसे।

हिमाल बुलाये मुझे बार बार,
मिलना है इससे काफी बार।
वक़्त है कम पर देखने है हिमाल के कई रूप कई रंग।
और कुछ देखूं न देखूं,
पर मिलूंगी तुझसे मैं कई बार।

मन करता है
तुझे समेट के ले जाऊ
अपने साथ अपनी नगरी।
पर वह कैसा प्यार जिसमें तू खुश न हो।
आउंगी तुझसे मिलने मैं दोबारा,
और कई बार,
इतना पता है मुझे, मेरे हिमाल।